Earables यानी कान की डिवाइसेज अब एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं हैं। इन डिवाइस ने काम करने, हेल्थ पर नजर रखने और यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य का खयाल रखने का तरीका ही बदल दिया है। आइए जानें…
तकनीक जिस तेजी से बदल रही है, उसी स्पीड से लाइफस्टाइल में भी बदलाव आ रहा है। पहले जहां म्यूजिक सुनने या काल करने के लिए लोग केवल वायर्ड ईयरफोन या बड़े हेडफोन पर निर्भर थे, वहीं अब ईयरेबल्स ने इनकी जगह ले ली है। स्मार्टवाच और फिटनेस बैंड्स की तरह ही ईयरेबल्स अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।
ये न केवल गाने सुनने और कालिंग में सुविधा देते हैं, बल्कि हार्ट रेट, ब्लड आक्सीजन लेवल और यहां तक कि स्ट्रेस लेवल जैसी जानकारी भी ट्रैक कर सकते हैं। आज ईयरेबल्स में नाइज कैंसिलेशन, वायस असिस्टेंट इंटीग्रेशन, हेल्थ ट्रैकिंग सेंसर और लंबी बैटरी लाइफ जैसे फीचर्स मिल रहे हैं।
ईयरेबल्स क्या हैं
ये ऐसे छोटे-छोटे डिवाइस होते हैं, जो कान में या आसपास पहने जाते हैं, जिनमें खास सेंसर लगे होते हैं। इनमें से कुछ को हीयरेबल्स कहते हैं, जैसे-म्यूजिक के लिए ईयरफोन या सुनने में मदद करने वाले हियरिंग एड। ईयरेबल्स खासकर सेहत से जुड़े मामलों में इससे भी ज्यादा काम कर सकते हैं।
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सेहत की जांच
जैसे कलाई से स्मार्टवाच के जरिए हार्ट रेट या आक्सीजन लेवल मापा जाता है, उसी तरह कान से भी कई जरूरी चीजें मापी जा सकती हैं, जैसे- शरीर का तापमान, दिल की धड़कन, रक्त में आक्सीजन की मात्रा और सांस लेने की गति। खास बात यह है कि कान दिल और दिमाग जैसे अहम अंगों के करीब होता है, इसलिए यह कलाई से भी बेहतर डाटा दे सकता है।
उदाहरण के लिए कान से तापमान मापना तो पहले से ही आम है। आपने ईयर थर्मामीटर देखा होगा, जो इन्फ्रारेड तकनीक से तापमान मापता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कान का पर्दा दिमाग के उस हिस्से से जुड़ा होता है, जो शरीर का तापमान नियंत्रित करता है। स्मार्टवाच में उपयोग होने वाली पीपीजी तकनीक कान में बेहतर काम करती है

क्योंकि वहां खून की सप्लाई ज्यादा होती है और हिलने-डुलने से डाटा पर कम असर पड़ता है। कई कंपनियां अब ईयरेबल्स के जरिए सेहत की जांच पर काम कर रही हैं, जैसे- कोसिनस (Cosinuss) ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है, जो कान के पीछे पहना जाता है और तापमान, दिल की धड़कन और आक्सीजन लेवल मापता है।
ईयरस्विच नाम की कंपनी हियरिंग एड में ईयरमैट्रिक्स नाम का सेंसर जोड़ रही है, जो सांस की गति और ब्लड प्रेशर जैसी चीजें माप सकता है। माइंडमिक्स अल्ट्रासाउंड तकनीक से ईयरबड्स के जरिए दिल की सेहत की जानकारी देता है। ईयरेबल्स का मेंटल हेल्थ में भी उपयोग बढ़ रहा है।
खास तौर पर वैगस नर्व को बिना सर्जरी के एक्टिव करने की कोशिश हो रही है। इससे मिर्गी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में मदद मिल सकती है। बड़ी कंपनियां भी इस दौड़ में शामिल हो रही हैं। पिछले साल एपल ने ईयर पाड्स में सेहत मापने की तकनीक जोड़ने के लिए पेटेंट दायर किया था ।
हियरिंग एड का नया रूप
हियरिंग एड भी अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। यह अब सिर्फ सुनने में मदद नहीं करते हैं, बल्कि फिटनेस ट्रैकिंग, डिमेंशिया की जांच और गिरने का पता लगाने जैसे काम भी करते हैं। जैसे-जैसे तकनीक बढ़ रही है, ईयरेबल्स वियरेबल्स की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
Earables Technical Features ईयरेबल्स में तकनीकी फीचर्स
ईयरेबल्स में कई एडवांस टेक्नोलाजी का इस्तेमाल होता है ।
ब्लूटूथ कनेक्टिविटी : लगभग सभी ईयरेबल्स ब्लूटूथ 5.0 या उससे आगे के वर्जन पर आने लगे हैं। इससे बैटरी खपत कम होती है और कनेक्शन ज्यादा स्थिर रहता है ।
सेंसर टेक्नोलाजी : इनमें पीपीजी सेंसर (हार्ट रेट मापने के लिए), एसपीओ2 सेंसर (आक्सीजन लेवल के लिए) और मोशन सेंसर (स्टेप्स व एक्टिविटी ट्रैकिंग के लिए) शामिल होते हैं।
नाइज कैंसिलेशन : एक्टिव नाइज कैंसिलेशन अब प्रीमियम ईयरबड्स का आम फीचर बन चुका है, जिससे कालिंग और म्यूजिक का अनुभव बेहतर होता है ।
बैटरी और चार्जिंग : आजकल के ईयरेबल्स 6 से 10 घंटे तक बैकअप देते हैं और चार्जिंग केस के साथ 30-40 घंटे तक चल सकते हैं। कुछ माडल्स फास्ट चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट भी देते हैं ।
एआइ और स्मार्ट असिस्टेंट इंटीग्रेशन : जेमिनी, सिरी और एलेक्सा जैसे वायस असिस्टेंट्स अब सीधे ईयरेबल्स से कंट्रोल किए जा सकते हैं।
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